You, me and the world...

Wednesday, April 7, 2010

और ख्वाब...?

और रात जाने क्यूँ खड़ी है खिड़की में?
शायद नाराज है या शरमाती है अन्दर आने में.........
नींद भी दस्तक तो देना चाहती है पलकों पे,
बस खुली आँखों में उतरना इसकी फितरत नहीं........
और ख्वाब?
वो तो सभी तुम्हारे थे.....
अब तुम नहीं तो ख्वाब कहाँ?


आज की शब् तुम्हारे सिवा सभी कुछ अपनी जगह पर है....
पर थोडा कुछ कम होने से कितना कुछ कम लगता है.........




I read it from somewhere, actually don't know from where...but willingly want to post it. So enjoy...

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1 Comments:

  • 4 mine:-

    A-4-Ashish
    B-4-Bro
    C-4-Caring...

    really a uniq way or say stylish way of the purposefull time pass.Really amazing.Ur best blog.Sala blog hai ya biography...???

    By Blogger Arpit Sharma, At April 27, 2010 at 11:40 AM  

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